2025 और 2026 के दौरान पश्चिम बंगाल में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने ऐसे कई नामजद बांग्लादेशी नागरिकों के मामले दर्ज किए जिनके पास भारतीय वोटर आईडी, आधार और राशन कार्ड थे, और कुछ ने ये कागजात भारत आने के कुछ ही महीनों में बनवा लिए थे। 4 नवंबर 2025 को जब मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू हुआ, तो हकीमपुर सीमा चौकी पर हजारों लोग बांग्लादेश लौटने के लिए कतार में लग गए। लेकिन भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने करीब 90.8 लाख नाम हटाए और "विदेशी" की कोई श्रेणी कभी प्रकाशित नहीं की, इसलिए सूची में 1 से 1.25 करोड़ घुसपैठियों के भाजपा के दावे को आधिकारिक आंकड़ों का कोई समर्थन नहीं है।
मुख्य बातें
- कोलकाता पुलिस ने जुलाई 2025 के आखिर में बांग्लादेशी नागरिक शांता पॉल को भारतीय आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड के साथ गिरफ्तार किया, और पीटीआई के मुताबिक वह गिरफ्तारी से कुछ ही महीने पहले भारत आई थी।
- चुनाव आयोग ने एसआईआर में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों से मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित, दोहरे और "फर्जी" श्रेणियों में करीब 90.8 लाख नाम हटाए, और विदेशियों या गैर-नागरिकों की कोई श्रेणी या गिनती प्रकाशित नहीं की।
- भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने जुलाई 2025 में दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में करीब 1.25 करोड़ अवैध प्रवासी हैं, लेकिन चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय या बीएसएफ के आंकड़ों में इस संख्या का कोई सबूत नहीं है।
- मई 2026 में बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा कि 4 नवंबर 2025 को पश्चिम बंगाल में एसआईआर शुरू होने के बाद से कम से कम 25,000 बांग्लादेशी नागरिक भारत से वापस गए, और जून 2026 में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि करीब 10,000 लोगों को वापस भेजा गया है।
- तृणमूल कांग्रेस ने 1.25 करोड़ घुसपैठियों के दावे को सांप्रदायिक बयानबाजी बताया और कहा कि दिसंबर 2025 की मसौदा सूची में चुनाव आयोग के 1.83 लाख "फर्जी" नाम भाजपा के आंकड़े की "हवा निकाल" देते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2026 में कहा कि मतदाता सूची से नाम कटना नागरिकता पर फैसला नहीं है, और चुनाव आयोग को संदिग्ध मामले केंद्र सरकार को भेजने होंगे, जो नागरिकता तय करती है।
- एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल से "भागते" बांग्लादेशियों के वायरल वीडियो झूठे थे: एक में नदिया में काली प्रतिमा विसर्जन की भीड़ थी और दूसरे में बांग्लादेश में काम पर जाते गारमेंट मजदूर।
संक्षेप में जवाब
दो बातें एक साथ सच हैं। पहली, पश्चिम बंगाल में ऐसे बांग्लादेशी नागरिकों के प्रमाणित मामले हैं जिन्होंने एजेंटों और जाली दस्तावेजों के जरिए वोटर आईडी कार्ड (ईपीआईसी) समेत भारतीय पहचान पत्र हासिल किए। दूसरी, राजनीतिक नेता जितने बड़े पैमाने का दावा करते हैं, उसका समर्थन चुनाव आयोग, केंद्रीय गृह मंत्रालय या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के किसी प्रकाशित आंकड़े से नहीं होता।
एसआईआर में हटाए गए नामों का चुनाव आयोग का अपना ब्योरा मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या लापता, दोहरे और "फर्जी" नामों की श्रेणियां बताता है। इसमें विदेशियों या गैर-नागरिकों की कोई श्रेणी नहीं है। Reporters' Collective सीमा से जुड़ा सबसे बड़ा आंकड़ा, यानी नवंबर 2025 से करीब 25,000 लोगों का वापस जाना, बीएसएफ के एक अनाम अधिकारी से आया है। ThePrint
भारतीय दस्तावेजों वाले बांग्लादेशियों के प्रमाणित मामले
नीचे दिए मामलों की खबर समाचार एजेंसियों ने पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से दी। मिली रिपोर्टों में किसी भी मामले में अब तक सजा नहीं हुई थी। जहां कोई ब्योरा सिर्फ पुलिस या एजेंसी के बयान पर टिका है, उसे दावा के रूप में चिह्नित किया गया है।
शांता पॉल, कोलकाता: आने के कुछ महीनों में भारतीय पहचान पत्र
प्रमाणित जुलाई 2025 के आखिर में कोलकाता पुलिस के एंटी राउडी सेक्शन ने बिक्रमगढ़ इलाके के एक फ्लैट पर छापा मारकर शांता पॉल को गिरफ्तार किया। वह बांग्लादेशी महिला हैं, जो बांग्लादेश में रीजेंट एयरवेज में एयरलाइन क्रू सदस्य और छोटी-मोटी मॉडल के तौर पर काम कर चुकी थीं। पुलिस ने उनके नाम के बांग्लादेशी पासपोर्ट जब्त किए। PTI via The Week
इनके साथ पुलिस को भारतीय दस्तावेज भी मिले: आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और राशन कार्ड। पुलिस के मुताबिक उन्होंने पहले पार्क स्ट्रीट पर एक कमरा किराए पर लिया, उस पते और एक एजेंट की मदद से राशन कार्ड बनवाया, फिर एक दूसरे व्यक्ति के जरिए फर्जी आधार और वोटर आईडी हासिल किए, और आखिर में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। PTI via The Week
सबसे अहम बात समय की है। पीटीआई के मुताबिक वह वैध पासपोर्ट पर गिरफ्तारी से कुछ ही महीने पहले भारत आई थीं। पुलिस ने कहा कि वह भारतीय कागजात पर विदेश जाने की योजना बना रही थीं, और पुलिस यह जांच रही है कि क्या किसी अधिकारी ने सत्यापन में मदद की। PTI via The Week
यह कुछ ही महीनों में भारतीय पहचान पत्रों का पूरा सेट हासिल कर लेने का सबसे साफ प्रमाणित उदाहरण है। मुख्यधारा की किसी रिपोर्ट में सीमा पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला जिसने कहा हो कि वह कुछ ही महीने पहले आया था।
आजाद मलिक और ईडी का पासपोर्ट मामला
प्रमाणित 15 अप्रैल 2025 को ईडी ने कोलकाता में आजाद मलिक, उर्फ अहम्मद हुसैन आजाद, को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया। ईडी ने सात ठिकानों पर तलाशी ली और ₹13.45 लाख नकद, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए। विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 13 दिन की ईडी हिरासत में भेजा। PTI via The Week
दावा · ईडी ईडी ने कहा कि वह पैसे लेकर बांग्लादेशी नागरिकों को धोखाधड़ी से भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड दिलाने में मदद करता था। धन शोधन का यह मामला विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दर्ज पुलिस एफआईआर से निकला था। PTI via The Week
दावा · ईडी बाद में मामले का दायरा बढ़ा। 29 अप्रैल 2025 को ईडी ने कोलकाता की एक अदालत को बताया कि उसने कबूल किया है कि वह मूल रूप से पाकिस्तान का है, जाली कागजात से बांग्लादेशी नागरिकता ली, और फिर उसी तरीके से भारतीय दस्तावेज बनवाए। ईडी के मुताबिक वह दमदम उत्तर में मतदाता के रूप में दर्ज था और उसने 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला, और ईडी चुनाव आयोग से पूछ रहा है कि उसका वोटर कार्ड कैसे जारी हुआ। IANS
13 अक्टूबर 2025 को ईडी ने नदिया जिले के इंदुभूषण हलदर को गिरफ्तार किया, जिसे उसका मुख्य सहयोगी बताया गया। ईडी ने हलदर को उन करीब 250 मामलों से जोड़ा जिनमें बांग्लादेशी नागरिकों ने जाली कागजात पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। मुख्य आरोपी के खिलाफ कोलकाता की सत्र अदालत में आरोप पत्र दाखिल हो चुका था। Tribune
हकीमपुर: कतार में खड़े लोगों ने दलालों के बारे में बताया
पीटीआई को खुद बताया नवंबर 2025 में पीटीआई के संवाददाताओं ने उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर में बीएसएफ की हकीमपुर चौकी पर वापस जाने का इंतजार कर रहे लोगों से बात की। रिपोर्ट के मुताबिक कतार में खड़े कई लोगों ने दलालों और बिचौलियों के जरिए आधार, राशन या वोटर कार्ड बनवाए थे। PTI via The Hitavada
- मनीरुल शेख, 29, जो धुलागोरी की गारमेंट इकाइयों में काम करते थे और कबाड़ लोहा जमा करते थे: "मैंने दस्तावेज बनवाने के लिए करीब 20,000 रुपये दिए।"
- इमरान गाजी: "मैंने 2016, 2019, 2021 और 2024 में वोट डाला। लेकिन मेरे पास 2002 के कोई कागज नहीं हैं।" (2002 पिछले गहन पुनरीक्षण का आधार वर्ष है, जिससे एसआईआर फॉर्म का मिलान होता है।)
- कोलकाता में आठ साल से रह रहे एक अनाम वेटर: "अगर वे पुराने कागज जांचेंगे, तो हम कुछ नहीं दिखा पाएंगे। सवाल पूछे जाने से पहले ही चले जाना बेहतर है।"
- सातखीरा से आए एक समूह ने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में घुसने के लिए ₹5,000 से ₹7,000 दिए थे।
इन लोगों का भारत में रहना करीब एक साल से लेकर करीब 18 साल तक का था। ये संवाददाताओं को दिए गए बयान हैं, किसी अदालत या आधिकारिक जांच के निष्कर्ष नहीं। The Week
बारासात: दो देशों की सूचियों में एक नाम
पुष्टि नहीं 8 फरवरी 2026 को एसआईआर की मसौदा सूची जांच रहे माइक्रो-ऑब्जर्वरों ने उत्तर 24 परगना के बारासात में दर्ज मंजू रानी साहा को चिह्नित किया, जिनके पास भारतीय ईपीआईसी और हृदयपुर के पते वाला आधार कार्ड था। सूत्रों के मुताबिक वह बांग्लादेश के नारायणगंज सदर में भी पंजीकृत थीं और वहां वोट डाल चुकी थीं। चुनाव अधिकारियों ने जांच शुरू की। यह रिपोर्ट अनाम सूत्रों पर आधारित थी और अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की। National Herald
कालना, पूर्व बर्धमान: ₹1,000 में वोटर कार्ड
दावा · पुलिस 24 जून 2026 को कालना के मल्लिकबागान में पुलिस ने मतदाता रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद रफीक शेख (उर्फ सिराज), उनकी पत्नी जरीना शेख और हनीफ शेख को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक उन्होंने बताया कि वे बांग्लादेश से सीमा पार करके आए थे और स्थानीय दलाल सलीम शेख के जरिए ₹1,000 प्रति कार्ड के हिसाब से वोटर आईडी खरीदे थे। ये पूछताछ के बारे में पुलिस के बयान हैं, जिनकी खबर यूएनआई ने दी। UNI
दस्तावेज कैसे हासिल किए गए
इन मामलों में पुलिस और प्रवासी एक ही क्रम बताते हैं: पहले एक स्थानीय पता, अक्सर किराए का कमरा; फिर एजेंट के जरिए राशन कार्ड; फिर आधार और वोटर कार्ड; और कभी-कभी पासपोर्ट का आवेदन। बताई गई कीमतें ₹1,000 प्रति वोटर कार्ड (कालना पुलिस का बयान) से लेकर दस्तावेजों के एक सेट के लिए "करीब 20,000 रुपये" (मनीरुल शेख) तक हैं। ईडी का मामला एक बड़े पैसे वाले नेटवर्क की बात करता है, जिसमें एक सहयोगी से करीब 250 पासपोर्ट मामले जुड़े हैं। PTI via The Week Tribune
पश्चिम बंगाल में एसआईआर और नाम हटाने की श्रेणियां
चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को एसआईआर के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल समेत नौ राज्य और तीन केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे। बंगाल में घर-घर गणना 4 नवंबर 2025 को शुरू हुई। The Hindu, via Wikipedia
प्रमाणित 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मसौदा सूची में 58,20,898 नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 से घटकर 7,08,16,631 रह गई। पीटीआई ने यह ब्योरा दिया: PTI via The Week
- मृत: 24,16,852
- स्थायी रूप से स्थानांतरित: 19,88,076
- पते पर अनुपस्थित या लापता: 12,20,038
- "फर्जी" या जाली नाम: 1,83,328
- दोहरे नाम: करीब 1.38 लाख
- अन्य: 57,000 से ज्यादा
बताए गए उप-आंकड़ों का जोड़ घोषित कुल संख्या से थोड़ा ज्यादा बैठता है, जो मूल रिपोर्ट की एक विसंगति है।
नाम क्यों हटाए गए (मसौदा सूची, 16 दिसंबर 2025), लाख में
प्रमाणित 28 फरवरी 2026 की अंतिम सूची में 63.66 लाख नाम हटे दिखे, जो मतदाताओं का करीब 8.3% है। अन्य 60.06 लाख मतदाताओं को न्यायिक अधिकारियों के निर्णय के लिए रखा गया। इनमें से 27.16 लाख नाम हटाए गए और 32.68 लाख बने रहे, जिससे 7 अप्रैल 2026 तक कुल हटाए गए नाम करीब 90.83 लाख हो गए। PTI via ThePrint 12वीं और अंतिम पूरक सूची 6 अप्रैल 2026 की आधी रात को प्रकाशित हुई। The Wire
प्रमाणित गैर-नागरिक होना नाम हटाने का घोषित आधार नहीं था। चुनाव आयोग ने बंगाल में हटाए गए विदेशियों या गैर-भारतीयों की कोई गिनती प्रकाशित नहीं की है, और यह भी नहीं बताया कि उसने ऐसी कोई सूची बनाई है या नहीं। Reporters' Collective 23 जनवरी 2026 के एक आरटीआई आवेदन के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उसके पास घुसपैठियों की पहचान, गिरफ्तारी या निर्वासन का कोई केंद्रीय आंकड़ा नहीं है। The Wire
दावा · आईएसएएस, एनयूएस रोनोजॉय सेन की मई 2026 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मुस्लिम बहुल सीटों पर अनुपात से कहीं ज्यादा नाम हटे। ISAS दावा · शोधकर्ता साबिर अहमद हिंदू शरणार्थी परिवारों वाले मतुआ इलाके में "अनमैप्ड" मतदाताओं का हिस्सा करीब 7.8% था, जो राज्य के औसत का लगभग दोगुना है। eNewsroom
वापसी: बीएसएफ ने क्या बताया
एसआईआर शुरू होने के कुछ ही दिनों में हकीमपुर चौकी पर कतारें लग गईं। अधिकारियों के मुताबिक बीएसएफ ने बायोमेट्रिक्स दर्ज किए, आपराधिक रिकॉर्ड जांचा, ज्यादातर लोगों को बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) को सौंप दिया, और किसी अपराध से जुड़े लोगों को राज्य पुलिस को भेजा। PTI via Deccan Herald
- 19 नवंबर 2025: बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उत्तर 24 परगना और मालदा के बिना बाड़ वाले हिस्सों से सीमा पार करने की कोशिशों में "भारी उछाल" की बात कही। जो रोजाना पकड़ "मुश्किल से दो अंकों में पहुंचती थी", वह बढ़कर "100, 150 या ज्यादा" हो गई, हालांकि "500 जितनी नहीं"। अधिकारियों ने कहा कि लगभग किसी के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे। PTI via Deccan Herald
- 21 नवंबर 2025: हकीमपुर में बीएसएफ ने कहा कि एसआईआर शुरू होने के बाद से करीब 1,600 बांग्लादेशी नागरिक लौट चुके हैं। All India Radio
- 23 नवंबर 2025: बीएसएफ ने कहा कि रोज 150 से 200 लोगों को पकड़कर सत्यापन के बाद वापस भेजा जा रहा है, यानी छह दिन में करीब 1,200। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि दो दिन में 95 लोगों को पकड़ा गया और थानों में और लोगों के लिए जगह नहीं है। The Week
- 1 दिसंबर 2025: पीटीआई ने खबर दी कि "अवैध रूप से सीमा पार करने की कोशिश में 10,000 से ज्यादा बांग्लादेशी पकड़े गए"। इसकी अवधि नहीं बताई गई। PTI via Deccan Herald
- 26 मई 2026: हकीमपुर में एक दिन में 150 लोगों की जांच हुई, 60 को वापस भेजा गया और 90 को पुलिस को सौंपा गया। बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा कि 4 नवंबर 2025 से कम से कम 25,000 बांग्लादेशी नागरिक भारत से वापस गए हैं। ThePrint
- 23 जून 2026: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा को बताया कि करीब 10,000 लोगों को वापस भेजा गया है और करीब 1,800 लोग 12 होल्डिंग सेंटरों में हैं। TBS
बीएसएफ अधिकारियों ने खुद सावधानी बरतने को कहा। एक ने कहा कि स्थानीय अनुमान "अक्सर अनौपचारिक बातों से आते हैं और बढ़ा-चढ़ाकर बताए जाते हैं"। दूसरे ने कहा: "हम यह नहीं मान सकते कि यहां हर कोई बस अपने घर लौट रहा है।" PTI via Deccan Herald
बांग्लादेश वापसी, जैसा अधिकारियों ने बताया
भाजपा का 1 से 1.25 करोड़ का दावा बनाम चुनाव आयोग के आंकड़े
दावा · शुभेंदु अधिकारी (भाजपा) 26 जुलाई 2025 को पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल की मतदाता सूची में करीब 1.25 करोड़ अवैध प्रवासी हैं और एसआईआर के बाद उन्हें निर्वासित किया जाएगा। उनका तर्क था कि अगर बिहार में करीब 50 लाख नाम हटे, तो बंगाल में "1.25 करोड़ तक" हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न से भागकर आए हिंदुओं को डरने की जरूरत नहीं है। Business Standard 3 अगस्त 2025 को उन्होंने "1 करोड़ रोहिंग्या, बांग्लादेशी, फर्जी मतदाताओं" की बात कही। Punjab Kesari
मसौदा सूची के बाद उन्होंने कहा: "यह तो बस शुरुआत है। अभी नाश्ता शुरू हुआ है। फिर लंच होगा, चाय होगी और फिर डिनर।" PTI via The Week दावा · भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन 2 मार्च 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बंगाल की सूची से "50 लाख से ज्यादा घुसपैठिए" हटाए गए हैं। The Hitavada
कोई सबूत नहीं इनमें से कोई भी आंकड़ा चुनाव आयोग की किसी विज्ञप्ति में नहीं है। आयोग की श्रेणियां मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित, दोहरे और "फर्जी" हैं। 50 लाख का आंकड़ा तभी बन सकता है जब मृत और स्थानांतरित लोगों को भी घुसपैठिया गिना जाए। Reporters' Collective द वायर ने बाद में बताया कि अधिकारी ने 1.5 करोड़ "घुसपैठियों" का आंकड़ा भी दिया था, जिसे उसने बिना सबूत का बताया। The Wire
सरकार का पक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि विपक्ष "घुसपैठिया वोट बैंक" बचाने के लिए एसआईआर का विरोध करता है। Tribune चुनाव आयोग के मुताबिक एसआईआर का घोषित उद्देश्य दोहरे, मृत या अपात्र नाम हटाना है। Al Jazeera
तृणमूल कांग्रेस का पक्ष
दावा · टीएमसी टीएमसी प्रवक्ता देबांग्शु भट्टाचार्य ने 1.25 करोड़ के आंकड़े को मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने वाली सांप्रदायिक बयानबाजी बताया और भाजपा को चुनौती दी कि वह अपनी सूची चुनाव आयोग को सौंपे। उन्होंने पूछा, "क्या वह सच में इतनी बड़ी संख्या की पहचान कर सकते हैं?" Business Standard
दावा · टीएमसी 16 दिसंबर 2025 को टीएमसी के कृशानु मित्रा ने कहा कि 1.83 लाख "फर्जी" नामों का आंकड़ा 1 करोड़ के दावे की "हवा निकाल" देता है। उन्होंने हकीमपुर से करीब 4,000 लोगों के जाने के बीएसएफ आंकड़े का हवाला दिया और पूछा: "अगर मौतों को छोड़ दें, तो बाकी हटाए गए मतदाता कौन हैं? वे किन सीमाओं से गए?" पार्टी ने कहा कि मतुआ बहुल इलाकों में करीब 9% और मुस्लिम बहुल सीटों पर करीब 0.6% नाम हटे। ये प्रतिशत टीएमसी का अपना विश्लेषण हैं। PTI via The Week
तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी 2026 को याचिका दायर कर एसआईआर को "अपारदर्शी, जल्दबाजी भरा, असंवैधानिक और अवैध" बताते हुए चुनौती दी और "बड़े पैमाने पर मताधिकार छिनने" की चेतावनी दी। वह खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं, जिसने फरवरी की शुरुआत में नोटिस जारी किया। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध कराने में नाकाम रहा। The Leaflet
इससे पहले, 2 जनवरी 2025 को बनर्जी ने बीएसएफ पर "घुसपैठियों को भारत में घुसने देने" का आरोप लगाया था। बीएसएफ के एक अधिकारी ने जवाब दिया कि बल "24 घंटे सातों दिन चौकसी" रखता है। PTI via The Week
सुप्रीम कोर्ट: सूची से नाम कटना नागरिकता पर फैसला नहीं
प्रमाणित 27 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने एसआईआर को चुनाव आयोग के वैधानिक अधिकारों के भीतर मानते हुए सही ठहराया और इसे "न मनमाना, न अत्यधिक" बताया। The Week फैसले में यह भी कहा गया कि सूची से नाम कटने से नागरिकता खत्म नहीं होती, और आयोग से कहा गया कि वह संदिग्ध गैर-नागरिकों के नाम चार हफ्ते के भीतर गृह मंत्रालय को दे। Reporters' Collective
चार हफ्ते बाद भी ऐसे कोई नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे। The Wire
प्रमाणित 18 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के प्रसेनजीत बोस की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आयोग संदिग्ध नाम हटा सकता है लेकिन नागरिकता तय नहीं कर सकता। पीठ ने कहा, "हमने ईसी से कहा था कि संदिग्ध नागरिकता वाले लोगों की सूची केंद्र सरकार को भेजे।" जस्टिस बागची ने कहा कि जब तक केंद्र नागरिकता अधिनियम के तहत किसी मामले पर फैसला नहीं करता, तब तक व्यक्ति की स्थिति "जारी रहनी चाहिए"। TNM
वकील ने कोर्ट को बताया कि 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में करीब 34 लाख अपीलें दायर हुई हैं। जिन करीब 38,000 पर फैसला हुआ, उनमें से लगभग 70% में मतदाता का नाम सूची में बहाल हुआ। याचिका मई और जून 2026 के उन राज्य आदेशों को चुनौती देती है जिनमें एसआईआर में नाम कटने को कल्याणकारी योजनाओं में कटौती से जोड़ा गया। TNM
अनुच्छेद 9, 10, 11 और 12 के तहत स्थिति के मामले में ईसीआई संवैधानिक प्राधिकारी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, मौखिक टिप्पणी, SabrangIndia की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026
अनुच्छेद 9 से 12 संविधान के वे प्रावधान हैं जो तय करते हैं कि नागरिक कौन है। SabrangIndia
"पलायन" के फर्जी वीडियो
हकीमपुर पर असली कतारों की खबर पीटीआई ने दी थी और बीएसएफ के आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई। इसके साथ-साथ कई वीडियो झूठे दावों के साथ शेयर किए गए।
- झूठ सीमा के गेट वाली भीड़। 9 नवंबर 2025 से कंटीले तारों की बाड़ में बने एक गेट से गुजरती भीड़ का वीडियो एसआईआर से भागते बांग्लादेशी बताकर शेयर किया गया, जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद भी शामिल थे। इसमें असल में नदिया जिले के शिकारपुर/फुनकातला में माथाभांगा नदी की ओर जा रही काली पूजा प्रतिमा विसर्जन की भीड़ थी। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने इसकी पुष्टि की, और मूल वीडियो 30 अक्टूबर 2025 को पोस्ट हुआ था। Alt News पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी इस दावे को फर्जी बताया। Rumor Scanner
- झूठ नदी किनारे "घर वापसी" की कतार। "एसआईआर की घोषणा होते ही अवैध लोग कर रहे 'घर वापसी'" कैप्शन वाली एक क्लिप में असल में बांग्लादेश के खुलना डिवीजन के मोंगला घाट पर काम पर आते-जाते गारमेंट मजदूर थे। एक स्थानीय पत्रकार ने कहा: "यह कोई सीमा नहीं है।" BOOM Factly Fact Crescendo
- मई 2026 में दिप्रिंट ने कहा कि वह हकीमपुर की कतारों के नए वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका। ThePrint
2026 का चुनाव और अधिकारी सरकार
प्रमाणित पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान हुआ, 23 अप्रैल (152 सीटें) और 29 अप्रैल 2026 (142 सीटें) को। PTI via ThePrint वोटों की गिनती 4 मई को हुई। Statesman भाजपा ने करीब 46% वोट के साथ 294 में से 207 सीटें जीतीं, जबकि 2021 में उसके पास 77 थीं। टीएमसी करीब 41% वोट के साथ 215 से घटकर 80 सीटों पर आ गई। ISAS
9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्यपाल आर.एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी को राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। All India Radio
दावा · आईएसएएस, एनयूएस क्या नाम कटने से नतीजा तय हुआ? भाजपा की जीती 105 सीटों पर कुल हटाए गए नाम उसकी जीत के अंतर से ज्यादा थे। लेकिन आईएसएएस के लेखक का निष्कर्ष था कि एसआईआर से कुल जनादेश "बुनियादी तौर पर नहीं बदलता"। ISAS
नई सरकार ने सीमा के मुद्दे पर तेजी से कदम उठाए:
- 13 मई: अधिकारी ने कहा कि किसी "मृत व्यक्ति, अवैध घुसपैठिए या गैर-भारतीय" को राज्य की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। प्रमाणित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का 4 जून का आदेश असल में मृत, स्थानांतरित या अनुपस्थित के रूप में हटाए गए लोगों, दो से ज्यादा वोटर कार्ड रखने वालों और गलत जानकारी देने वालों पर केंद्रित था। इसमें घुसपैठियों का जिक्र नहीं था। Reporters' Collective
- 23 मई: गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने जिलों से निर्वासन का इंतजार कर रहे "संदिग्ध अवैध विदेशियों" के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने को कहा, जिसमें बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं का नाम लिया गया। The Wire
- 23 जून: अधिकारी ने कहा कि नीति जेल की नहीं बल्कि वापस भेजने (पुश-बैक) की है, ताकि हिरासत पर होने वाला खर्च कल्याण योजनाओं में लगे। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी छह महीने में पूरी हो जाएगी। उन्होंने "असली नागरिकों" से कहा कि चिंता न करें, "इससे फर्क नहीं पड़ता कि वे किस धर्म या समुदाय के हैं"। TBS
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा कि सरकार बदलने के बाद अगर लोगों को जबरन धकेला गया (पुश-इन) तो ढाका "कार्रवाई करेगा"। The Wire
घटनाक्रम
ईडी ने आजाद मलिक को गिरफ्तार किया
बांग्लादेशियों के लिए पासपोर्ट और आधार बनवाने का कथित रैकेट; ₹13.45 लाख जब्त। PTI
शांता पॉल गिरफ्तार
कोलकाता पुलिस को भारत आने के कुछ महीनों बाद ही उनके पास भारतीय आधार, वोटर और राशन कार्ड मिले। PTI
1.25 करोड़ का दावा
शुभेंदु अधिकारी ने तमलुक में यह दावा किया। Business Standard
बंगाल में एसआईआर शुरू
उसी दिन हकीमपुर में कतारें लगनी शुरू हुईं। The Week
मसौदा सूची: 58.2 लाख नाम हटे
1.83 लाख नाम "फर्जी" चिह्नित; विदेशी की कोई श्रेणी नहीं। PTI
अंतिम सूची
63.66 लाख नाम हटे और 60.06 लाख न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए। ThePrint
भाजपा ने 207 सीटें जीतीं
अधिकारी ने 9 मई को शपथ ली। AIR
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को सही ठहराया
नाम कटने से नागरिकता खत्म नहीं होती; संदिग्ध गैर-नागरिकों के मामले गृह मंत्रालय को भेजे जाएंगे। Reporters' Collective
मुख्यमंत्री: करीब 10,000 वापस भेजे गए
करीब 1,800 लोग 12 होल्डिंग सेंटरों में। TBS
दोनों पक्षों की बात
भाजपा और राज्य सरकार का पक्ष
बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासी बंगाल की मतदाता सूचियों में हैं और पिछले चुनावों को प्रभावित कर चुके हैं। एसआईआर और सीमा पर लगी कतारें दिखाती हैं कि समस्या असली है। नामजद मामले बताते हैं कि एजेंट भारतीय कागजात उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य अब बीएसएफ के जरिए लोगों को वापस भेज रहा है, सीमा पर बाड़ लगा रहा है, और कहता है कि किसी भी धर्म के असली नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है। PTI TBS
टीएमसी और आलोचकों का पक्ष
करोड़ों वाले आंकड़े राजनीतिक हैं और उनका कोई आधार नहीं: चुनाव आयोग को 1.83 लाख "फर्जी" नाम मिले, करोड़ों विदेशी नहीं, और उसके पास विदेशी की कोई श्रेणी ही नहीं है। नाम कटने की मार हिंदू शरणार्थी मतुआ इलाकों और मुस्लिम बहुल सीटों पर पड़ी, और जिन अपीलों पर फैसला हुआ उनमें से ज्यादातर में मतदाताओं के नाम बहाल हुए। सीमा की सुरक्षा बीएसएफ के जरिए केंद्र की जिम्मेदारी है। PTI TNM
अभी की स्थिति
- नामजद मामले: 2025-26 में कम से कम पांच प्रमाणित या रिपोर्ट किए गए मामले; सार्वजनिक रिपोर्टों में किसी में सजा नहीं मिली।
- हटाए गए नाम: बंगाल में करीब 90.8 लाख नाम हटे, विदेशियों की कोई प्रकाशित गिनती नहीं। ThePrint
- सीमा: बीएसएफ के एक अधिकारी के मुताबिक करीब 25,000 लोग वापस गए; मुख्यमंत्री के मुताबिक जून 2026 तक करीब 10,000 वापस भेजे गए।
- अदालतें: एसआईआर सही ठहराया गया; नाम कटना नागरिकता पर निष्कर्ष नहीं; न्यायाधिकरणों में अपीलें लंबित।
क्या अभी बाकी है
- क्या चुनाव आयोग ने संदिग्ध गैर-नागरिकों की कोई सूची गृह मंत्रालय को भेजी है, और उसमें कितने नाम हैं।
- एसआईआर न्यायाधिकरणों में करीब 34 लाख अपीलों का नतीजा।
- मलिक पासपोर्ट मामले और शांता पॉल मामले में मुकदमे।
- बीएसएफ और राज्य के पुश-बैक आंकड़ों की स्वतंत्र जांच।
लोग क्या पूछ रहे हैं
क्या पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी नागरिकों को सच में भारतीय वोटर आईडी मिल रहे हैं?
हां, कुछ प्रमाणित व्यक्तिगत मामलों में। कोलकाता पुलिस को शांता पॉल के पास भारत आने के कुछ महीनों बाद ही भारतीय वोटर आईडी और आधार मिले, और ईडी का कहना है कि आजाद मलिक ने धोखाधड़ी से बनवाए कार्ड पर 2021 और 2024 में वोट डाला। कुल मिलाकर ऐसे कितने मामले हैं, यह किसी आधिकारिक स्रोत से पता नहीं है।
एसआईआर में बंगाल की मतदाता सूची से कितने विदेशी हटाए गए?
इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। चुनाव आयोग ने मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित, दोहरे और "फर्जी" श्रेणियों में करीब 90.8 लाख नाम हटाए। उसने विदेशी या गैर-नागरिक की श्रेणी का कभी इस्तेमाल नहीं किया।
क्या भाजपा का 1.25 करोड़ घुसपैठियों का दावा सही है?
चुनाव आयोग के आंकड़ों में इसका कोई सबूत नहीं है। वापस जाने वालों का बीएसएफ का सबसे बड़ा आंकड़ा करीब 25,000 है, और आयोग ने मसौदा सूची में 1.83 लाख नाम "फर्जी" चिह्नित किए।
हकीमपुर से कितने बांग्लादेशी वापस गए?
बीएसएफ के आंकड़े 21 नवंबर 2025 तक करीब 1,600 से बढ़कर, मई 2026 में बताए गए एक बीएसएफ अधिकारी के अनुमान के मुताबिक 4 नवंबर 2025 से कम से कम 25,000 हो गए। ये आंकड़े अनाम अधिकारियों से हैं और अलग-अलग अवधियों के हैं।
क्या मतदाता सूची से नाम कटने का मतलब है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग नाम हटा सकता है लेकिन नागरिकता तय नहीं कर सकता। संदिग्ध मामले नागरिकता अधिनियम के तहत केंद्र सरकार के पास जाने चाहिए, और तब तक व्यक्ति की स्थिति बनी रहती है।
क्या बंगाल से भागते बांग्लादेशियों का वायरल वीडियो असली था?
सबसे ज्यादा शेयर हुए वीडियो झूठे थे। एक में नदिया में काली प्रतिमा विसर्जन की भीड़ थी, और दूसरे में बांग्लादेश के मोंगला घाट पर काम पर जाते गारमेंट मजदूर। हकीमपुर पर असली कतारों की खबर पीटीआई ने अलग से दी थी।
स्रोत
- PTI via The Week: Arrested Bangladeshi woman used fake documents to get Aadhaar, voter ID cards, 31 जुलाई 2025
- PTI via The Week: ED arrests Bangladeshi who 'illegally' made Indian passport, Aadhaar for compatriots, 16 अप्रैल 2025
- IANS: ED probes how arrested Pakistani national in Kolkata secured EPIC card and voted twice, 11 जून 2025
- Tribune: ED arrests Pak national's aide in fake passport racket, 19 अक्टूबर 2025
- PTI via The Hitavada: SIR sparks reverse migration of 'illegal Bangladeshis' at Hakimpur border, 24 नवंबर 2025
- The Week: SIR impact, how BSF is dealing with long queues of Bangladeshis, 23 नवंबर 2025
- National Herald: Bangladeshi national found on Bengal voter roll during special revision drive, 9 फरवरी 2026
- UNI: Kalna detentions over voter cards, 25 जून 2026
- Wikipedia (citing The Hindu): Special Intensive Revision
- PTI via The Week: EC publishes draft electoral rolls in Bengal, over 58 lakh names deleted, 16 दिसंबर 2025
- PTI via ThePrint: Nearly 91 lakh names deleted from Bengal electoral rolls after SIR, 7 अप्रैल 2026
- The Wire: Nearly 89 lakh names removed, five takeaways on the Bengal SIR, अप्रैल 2026
- The Reporters' Collective: West Bengal CM's claim on infiltrators and the welfare order, 21 जून 2026
- The Wire: Bengal CM orders holding centres for those awaiting deportation, 25 मई 2026
- eNewsroom: Bengal SIR exercise reveals surprising patterns in voter deletions, 18 दिसंबर 2025
- ISAS, NUS: Brief No. 1374 on the West Bengal election (Ronojoy Sen), 8 मई 2026
- PTI via Deccan Herald: Rise in illegal Bangladeshi nationals attempting crossings amid SIR, 19 नवंबर 2025
- All India Radio: Thousands of illegal Bangladeshi immigrants leaving India after SIR launch, 21 नवंबर 2025
- PTI via Deccan Herald: Over 10,000 Bangladeshis held while attempting illegal border crossings, 1 दिसंबर 2025
- ThePrint: 150 Bangladeshis checked at Hakimpur post, 60 pushed back, 90 handed to cops, 28 मई 2026
- TBS: 10,000 'illegal' immigrants sent back to Bangladesh so far, says CM Suvendu, 24 जून 2026
- Business Standard: Suvendu Adhikari claims 1.25 crore illegal voters in Bengal, TMC dares proof, 26 जुलाई 2025
- Punjab Kesari: Suvendu Adhikari claims 1 crore Rohingya, Bangladeshi, fake voters, 3 अगस्त 2025
- PTI via The Week: TMC says draft rolls 'puncture' BJP's 1 crore claim, 16 दिसंबर 2025
- The Hitavada: Over 50 lakh infiltrators removed from WB voter list, says BJP chief Nabin, 2 मार्च 2026
- Tribune: Opposition opposing SIR to protect infiltrator vote bank, says Shah
- Al Jazeera: India opposition leaders briefly arrested in protest against election chief, 6 अक्टूबर 2026
- The Leaflet: Citizens of West Bengal have been targeted by SIR, argues Mamata Banerjee, 5 फरवरी 2026
- PTI via The Week: Mamata accuses BSF of allowing infiltration, 2 जनवरी 2025
- The Week: Supreme Court upholds Special Intensive Revision, 27 मई 2026
- The Wire: Four weeks since the SIR judgment, where are the names of suspected foreigners?, 2 जुलाई 2026
- The News Minute: SC says Election Commission can delete voters but cannot decide citizenship, 18 जुलाई 2026
- SabrangIndia: ECI has no power to determine citizenship based on roll deletions, 21 जुलाई 2026
- Alt News: Viral video shows Kali idol immersion crowd, not an exodus, 24 नवंबर 2025
- Rumor Scanner: Idol immersion video falsely shared as Bangladeshis fleeing, 4 दिसंबर 2025
- BOOM: Video from Mongla, Bangladesh falsely linked to SIR, 15 नवंबर 2025
- Factly: Video filmed in Bangladesh falsely shared as illegal migrants leaving Bengal, नवंबर 2025
- Fact Crescendo: Video from Bangladesh falsely shared as immigrants fleeing Bengal, 15 नवंबर 2025
- Statesman: West Bengal election results 2026 highlights, 4 मई 2026
- All India Radio: Suvendu Adhikari takes oath as first BJP CM of West Bengal, 9 मई 2026