कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली पुलिस ने 9 अक्टूबर को अनुमति देने से इनकार कर दिया, पूरे नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू है, और केंद्र ने केंद्रीय बल तैनात करने के साथ मेट्रो स्टेशन और ट्रेनें बंद कर दी हैं। प्रदर्शन से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर "पूरी तरह रोक नहीं" होगी, जिसके बाद मेट्रो ने बंद स्टेशनों की सूची 57 से घटाकर 45 कर दी।
मुख्य बातें
- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक की मांग को लेकर 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया।
- दिल्ली पुलिस ने 9 अक्टूबर को सीजेपी के 10 अक्टूबर 2026 के जंतर मंतर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने कहा कि 10 दिन के नियम के बजाय आवेदन तीन दिन पहले आया, और समूह ने पिछले एक प्रदर्शन में अपनी अंडरटेकिंग तोड़ी थी।
- सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 9 अक्टूबर 2026 को कहा कि अनुमति न मिलने के बावजूद जंतर मंतर प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 19 विरोध का मौलिक अधिकार देता है और कार्यकर्ता हिरासत में जाने को तैयार हैं।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर 2026 के लिए सीएपीएफ की 221 कंपनियों को मंजूरी दी, और सीजेपी प्रदर्शन के लिए दिल्ली में 23,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती का अनुमान था।
- 9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर "पूरी तरह रोक नहीं" का आदेश दिया, जिसके बाद डीएमआरसी ने प्रवेश और निकास के लिए बंद स्टेशनों की सूची 57 से घटाकर 45 कर दी।
- सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2026 के प्रदर्शन के लिए अनुमति न देने के फैसले या बीएनएसएस की धारा 163 की निषेधाज्ञा को नहीं पलटा, और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार कानून के दायरे में ही इस्तेमाल होना चाहिए।
- पुलिस सूत्रों के मुताबिक 2 अक्टूबर से सीईसी विरोधी प्रदर्शनों को लेकर 8 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली में करीब 25 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें तीन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर पुलिस पर हमला करने और बाधा डालने का आरोप है।
प्रदर्शन किसने बुलाया और क्यों
यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी ने बुलाया है, जो मई 2026 में अभिजीत दिपके द्वारा शुरू किया गया एक ऑनलाइन युवा आंदोलन है। नीट पेपर लीक पर इसके जुलाई के अभियान का अंत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ हुआ था। Al Jazeera
इस बार की वजह इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बनी, जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार सीईसी के सामने आपत्तियां उठाई थीं, ज्यादातर मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर। Al Jazeera
24 सितंबर को सीजेपी ने कुमार को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का समय दिया। इसके बाद दिपके ने घोषणा की कि प्रदर्शन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई से शुरू होंगे। Al Jazeera दावा · अभिजीत दिपके उन्होंने सीईसी को "देश का सबसे बड़ा गद्दार" कहा और 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने का दावा किया। बिजनेस टुडे ने कहा कि वह उनके कुछ आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका। Business Today
2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में रैली के बाद दिपके ने एक्स पर दिल्ली प्रदर्शन की घोषणा की। उन्होंने लिखा: "अगर दिल्ली पुलिस हमें रोकने की कोशिश करती है, तो जहां वे हमें रोकेंगे, वही हमारा जंतर मंतर बन जाएगा।" Outlook
सीजेपी की मांगें
पार्टी इन मांगों को "गैर-समझौतावादी" बताती है। Outlook
- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही।
- मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक और जनवरी 2025 की मतदाता सूची की बहाली।
- एक स्वतंत्र जांच, और आगामी चुनावों को स्थगित करना।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 के कानून को रद्द कर उसकी जगह एक स्वतंत्र चयन प्रक्रिया।
दावा · चुनाव आयोग आयोग किसी भी गड़बड़ी से इनकार करता है। उसका कहना है कि पुनरीक्षण में दोहराए गए, मृत या अपात्र नाम हटाए जाते हैं और बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। 2 अक्टूबर को उसने अधिकारियों से कहा कि जो पात्र मतदाता गलती से सूची से छूट गए हैं, उनका पंजीकरण किया जाए। Al Jazeera IBTimes
और कौन शामिल हो रहा है
6 अक्टूबर को पांच वामपंथी छात्र संगठनों, एसएफआई, एआईएसएफ, आइसा, पीएसयू और एआईएसबी, ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे "बड़ी संख्या में" शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ "दिल्ली पुलिस धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज, घसीटने, मारपीट और छेड़छाड़" कर रही है। DT Next
7 अक्टूबर को सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई और आप से जुड़े छात्र संगठन एएसएपी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने समर्थकों से कहा: "यह लड़ाई आसान नहीं होने वाली। मैं देश भर के सभी लोगों से अपील करता हूं कि हमारे साथ जुड़ें, ट्रेन और फ्लाइट के टिकट बुक करें।" Outlook Deccan Herald
अनुमति: क्या मांगा गया और क्यों ठुकराया गया
दास ने 7 अक्टूबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एक पत्र दिया। उन्होंने कहा कि यह सूचना है, अनुरोध नहीं: "कृपया अनुमति शब्द का इस्तेमाल न करें। दिल्ली पुलिस कौन होती है हमें अनुमति देने वाली?" उन्होंने बताया कि पुलिस ने समूह से एक अंडरटेकिंग ली है। Outlook
प्रमाणित 9 अक्टूबर की सुबह संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने घोषणा की कि अनुमति नहीं दी गई है: "इस बार अनुमति खारिज कर दी गई है; इसे मंजूरी नहीं दी गई है।" ANI India TV
पुलिस का पक्ष उन्होंने चार कारण बताए। ANI Business Standard
- कम समय में सूचना। आवेदन 7 अक्टूबर को, यानी कार्यक्रम से तीन दिन पहले, नई दिल्ली जिले में पहुंचा। दिशानिर्देश के मुताबिक "सूचना प्रदर्शन से 10 दिन पहले मिलनी चाहिए।"
- पिछला आचरण। पहले जिस प्रदर्शन की सीजेपी को अनुमति मिली थी, उसमें "उन्होंने वैध निर्देशों का पालन नहीं किया और अपनी ही अंडरटेकिंग का पालन नहीं किया।"
- कानून-व्यवस्था। राजधानी में मौजूदा हालात।
- सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात। नई दिल्ली जिले में सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात बनाए रखना।
दिल्ली में प्रदर्शन के नियम
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपे दिल्ली पुलिस के दिशानिर्देशों के मुताबिक, जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले नई दिल्ली जिले के डीसीपी से अनुमति लेनी होती है। बताया गया है कि वहां अधिकतम 1,000 लोग जुट सकते हैं, और सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा या यातायात के आधार पर अनुमति ठुकराई जा सकती है। Business Standard
अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करता है, जिस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अधिकारी जंतर मंतर पर प्रदर्शनों के समय, स्थान और तरीके को नियंत्रित कर सकते हैं। Business Standard
सीजेपी का जवाब
दावा · अभिजीत दिपके 9 अक्टूबर को मुंबई में दिपके ने कहा कि प्रदर्शन होकर रहेगा और कार्यकर्ता हिरासत में जाने को तैयार हैं: "मुझे गिरफ्तार करो, मुझे हिरासत में लो!" उन्होंने कहा: "जंतर मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है; अनुच्छेद 19 विरोध का मौलिक अधिकार देता है।" उन्होंने यह भी पूछा: "आप ट्रेनें बंद कर देते हैं, मेट्रो बंद कर देते हैं, तो कोई क्या करे?" ANI The Statesman
सुरक्षा योजना: बल, मेट्रो, ट्रेनें और सड़कें
केंद्रीय बल
प्रमाणित केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के लिए सीएपीएफ की 221 कंपनियों को मंजूरी दी है, जो दिल्ली पुलिस के पास पहले से मौजूद 110 कंपनियों के अलावा हैं। 23,000 से ज्यादा जवानों की तैनाती का अनुमान है, साथ ही कई परतों में बैरिकेड, कंट्रोल रूम से निगरानी वाले सीसीटीवी और चेहरा पहचानने वाले कैमरे लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा को सतर्क रहने को कहा गया है। TNM
एक सावधानी: उसी रिपोर्ट में कंपनियों का जो ब्योरा दिया गया है (85 सीआरपीएफ, 10 एसएसबी, 7 आईटीबीपी, 7 आरएएफ, 1 सीआईएसएफ), उसका जोड़ 110 होता है, 221 नहीं, और इस अंतर की कोई व्याख्या नहीं दी गई। TNM अलग से, पीटीआई ने 7 अक्टूबर को बताया कि 1 अक्टूबर से कम से कम 20 सीएपीएफ कंपनियां मंगाई गई थीं और नई दिल्ली भर में करीब 4,000 जवान तैनात थे। ThePrint/PTI
निगरानी, कॉलेज और हिरासत की तैयारी
पुलिस का पक्ष अधिकारियों ने 7 अक्टूबर को पीटीआई को बताया कि पुलिस ये कदम उठा रही है: ThePrint/PTI
- एसएचओ से उन करीब 2,800 लोगों पर नजर रखने को कहा गया, जिन्हें जुलाई के प्रदर्शन में चेहरा पहचानने वाली तकनीक ने कथित आपराधिक रिकॉर्ड वाला बताया था। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
- कॉलेजों और पीजी मालिकों से कहा गया कि वे छात्रों को शामिल होने से रोकें।
- प्रवेश मार्गों पर, खासकर यूपी सीमा पर, बैरिकेड लगाने की योजना बनी।
- बड़ी संख्या में लोगों के गिरफ्तारी देने की स्थिति में स्टेडियमों में अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने पर चर्चा हुई।
दावा · दिपके 6 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस देकर प्रदर्शन में न जाने को कहा और पूछा कि उनकी यात्रा का खर्च कौन उठा रहा है। रिपोर्ट में पुलिस का कोई जवाब नहीं था। Deccan Chronicle/PTI दावा · सौरव दास, आशुतोष रांका 4 अक्टूबर को दोनों ने एक्स पर कहा कि 10 अक्टूबर से पहले सीजेपी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा, रांका ने लिखा "एनएसए/अन्य समान प्रावधानों के तहत"। कोई सबूत नहीं दिया गया और 9 अक्टूबर की शाम तक ऐसी किसी गिरफ्तारी की खबर नहीं थी। Outlook
मेट्रो स्टेशन
प्रमाणित 8 अक्टूबर के एक पत्र में संयुक्त पुलिस आयुक्त (परिवहन) रजनीश गुप्ता ने डीएमआरसी से 9 अक्टूबर रात 9 बजे से "अगले आदेश तक" 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने और ट्रेनों की आवृत्ति घटाने को कहा। इसका कारण संवेदनशील स्थानों की ओर भीड़ की संभावित आवाजाही बताया गया। TNM ANI
प्रमाणित सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद 9 अक्टूबर देर रात डीएमआरसी ने "आंशिक संशोधन" जारी किया। अब 45 स्टेशनों पर 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक प्रवेश और निकास बंद है, और नई दिल्ली को छोड़कर इन सभी पर इंटरचेंज खुला रहेगा। Business Today News24
इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ, पटेल चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली, आईटीओ, खान मार्केट, हौज खास, लाजपत नगर, जामिया मिलिया इस्लामिया, कश्मीरी गेट, करोल बाग, शाहदरा और रिठाला शामिल हैं। Business Today
ट्रेनें
प्रमाणित उत्तर रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली 165 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में से 38 को उनके शुरुआती स्टेशन से ही रद्द कर दिया, और दो अन्य ट्रेनें बीच में ही समाप्त होंगी। आनंद विहार, सराय रोहिल्ला, पुरानी दिल्ली और दिल्ली कैंट समेत दिल्ली के बाकी स्टेशनों पर सेवाएं सामान्य हैं। ThePrint/PTI
रेलवे का पक्ष मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने इसकी वजह "इन स्टेशनों के आसपास के इलाकों में सड़क यातायात में भारी जाम की आशंका" बताई। रद्द ट्रेनों में मगध एक्सप्रेस और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस शामिल हैं। ThePrint/PTI
सड़कें और इंटरनेट
प्रमाणित दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि 10 अक्टूबर सुबह 6 बजे से कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर मंतर और पटेल चौक के आसपास 30 जगहों पर डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं, और लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा। The Statesman
द स्टेट्समैन ने डीसीपी (स्पेशल सेल) मनीषी चंद्रा के हवाले से जनपथ और कर्तव्य पथ चौराहे के 4 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद रहने की खबर भी दी। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इंटरनेट पाबंदियां सिर्फ "कुछ संवेदनशील इलाकों" में हैं और उनकी समीक्षा की जाएगी। The Statesman LiveLaw
9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
9 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने माकपा महासचिव एम.ए. बेबी और अन्य की याचिका का उल्लेख किया, और कोर्ट ने लंच के बाद इस पर सुनवाई की। पीठ में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना थे। सीजेपी खुद इस मामले में पक्षकार नहीं थी। The Tribune ETV Bharat
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
- सिब्बल: "सारी ट्रेनें रद्द हैं। मेट्रो स्टेशन बंद हैं। आप कहीं आ-जा नहीं सकते।"
- गोपाल शंकरनारायणन: "शांतिपूर्ण विरोध गैरकानूनी नहीं है।"
- अभिषेक मनु सिंघवी ने उन कदमों को गिनाया जिन्हें उन्होंने अभूतपूर्व बताया: "सीएपीएफ की 221 कंपनियां...10 हिरासत केंद्र तैयार किए जा रहे हैं", ओयो होटलों को नई बुकिंग रोकने को कहा गया, यूट्यूबरों पर कार्रवाई और मीडिया से पहचान पत्र साथ रखने को कहा गया।
- वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पुलिस ने युवा महिलाओं को यह कहकर ट्रेनों से उतार लिया कि वे प्रदर्शन में जा रही थीं।
ये वकीलों की दलीलें हैं, कोर्ट के निष्कर्ष नहीं। The Tribune ETV Bharat
सरकार की दलीलें
सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पूरा शहर बंद होने की धारणा "सच से कोसों दूर" है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के मार्च के बाद हुई हिंसा को देखते हुए ये उपाय आनुपातिक हैं, और कुछ परिस्थितियों में पूरी तरह रोक भी आनुपातिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि उस हफ्ते प्रदर्शनकारियों ने कई महिला पुलिस अधिकारियों को परेशान किया और उनसे छेड़छाड़ की, पीठ से वीडियो देखने का आग्रह किया, और दलील दी कि अनुमति न होने के कारण प्रदर्शन गैरकानूनी है। LiveLaw ETV Bharat
पीठ ने क्या कहा
आनुपातिकता का एक सिद्धांत होता है… इसका मतलब यह नहीं कि मक्खी मारने के लिए हथौड़ा चलाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, 9 अक्टूबर 2026, ETV Bharat की रिपोर्ट के अनुसार
सीजेआई ने गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा से आने-जाने वालों को लेकर चिंता जताई और कहा कि पुलिस अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगा सकती है, लेकिन सब कुछ नहीं रोक सकती। जस्टिस बागची ने कहा कि आवृत्ति घटाना नियमन हो सकता है, लेकिन पूरी तरह बंद करना अतिवादी कदम होगा, और यह आदेश "परिवहन से जुड़ी कुछ सामान्य सुविधाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता प्रतीत होता है।" LiveLaw The Tribune
पीठ ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर भी सवाल उठाया और कहा कि "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार कानून के दायरे में ही इस्तेमाल होना चाहिए।" Business Today
आदेश
हम स्पष्ट करते हैं कि मेट्रो की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं होगी। (दिल्ली) मेट्रो और अन्य ट्रेनों को उचित रूप से नियंत्रित तरीके से चलाने की अनुमति देने पर सोच-समझकर फैसला लिया जा सकता है, ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो, और ऐसे फैसले का व्यापक प्रचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 9 अक्टूबर 2026, The Tribune की रिपोर्ट के अनुसार
- एडवाइजरी अखबारों और न्यूज वेबसाइटों पर प्रकाशित की जानी चाहिए। Business Today
- पक्षकारों ने सहमति जताई कि "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए सुविधाओं वाली कोई दूसरी जगह चिह्नित और निर्धारित की जानी चाहिए।" सक्षम प्राधिकारी इस पर विचार करेगा। The Tribune
- एसजी ने वैकल्पिक स्थल के विचार को "अच्छा सुझाव" बताया और कहा कि जल्द फैसला होगा। ETV Bharat
कोर्ट ने अनुमति न देने के फैसले या निषेधाज्ञा को रद्द नहीं किया। उसके सामने एकमात्र मुद्दा पुलिस आदेशों, मेट्रो बंदी और ट्रेनों के रद्द होने से आम नागरिकों को होने वाली असुविधा था। The Tribune
जुटने पर कौन-सी धाराएं लग सकती हैं
प्रमाणित सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात का हवाला देते हुए 10 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। The Tribune 2 अक्टूबर को लगे ऐसे ही आदेशों में पांच या ज्यादा लोगों के जुटने, जुलूस, धरने, बिना लिखित अनुमति नारे और भाषण, और बैनर, तख्तियां, लाठी या डंडे लेकर चलने पर रोक थी। Deccan Chronicle/PTI
पुलिस का पक्ष डीसीपी सृष्टि पांडे ने कहा कि पाबंदियां लागू रहने तक जंतर मंतर या कहीं और प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, और कोई भी जमावड़ा गैरकानूनी होगा। संयुक्त पुलिस आयुक्त प्रसाद ने कहा कि उल्लंघन करने वालों पर "उचित कानूनी कार्रवाई" होगी, हालांकि उन्होंने धाराओं का नाम नहीं लिया। ANI ANI
पिछले हफ्ते जिन धाराओं का इस्तेमाल हुआ, उनसे सबसे अच्छा अंदाजा मिलता है कि आगे क्या हो सकता है:
- बीएनएस 223 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना): छह महीने तक की सजा, ₹2,500 तक जुर्माना, या दोनों। अगर इससे जान, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा हो, या दंगा या मारपीट हो: एक साल तक की सजा, ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों। 2 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ी तीनों एफआईआर इसी धारा में थीं। Deccan Chronicle/PTI
- बीएनएस 189 (पांच या ज्यादा लोगों का गैरकानूनी जमावड़ा): छह महीने तक की सजा। तितर-बितर होने के वैध आदेश के बाद भी डटे रहने, या घातक हथियार के साथ शामिल होने पर दो साल तक की सजा। Bare text
- लोक सेवकों पर हमला या उनके काम में बाधा। राहुल और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर लोक सेवकों पर हमला करने और उनके कर्तव्य में बाधा डालने वाले बीएनएस प्रावधानों के तहत दर्ज हुईं, जिनमें ज्यादा कड़ी सजा है। ThePrint
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक प्रदर्शनों को लेकर करीब 25 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें कथित तोड़फोड़, मारपीट, पुलिस से हाथापाई और बाधा डालने के आरोप हैं। ANI मुंबई में पुलिस ने 2 अक्टूबर की शिवाजी पार्क रैली को लेकर दिपके, दास, रांका और 400 से ज्यादा अज्ञात समर्थकों पर गैरकानूनी जमावड़े, यातायात रोकने और बिना अनुमति लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने का मामला दर्ज किया। IBTimes
मीडिया के लिए एडवाइजरी
प्रमाणित 5 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए दिशानिर्देश जारी किए: "खबर मायने रखती है, और यह भी कि आप उसे कैसे हासिल करते हैं!" UNI इसके मुख्य बिंदु थे: Organiser
- पहचान पत्र साथ रखें और साफ दिखाएं: संस्थान का कार्ड या पीआईबी या डीआईपी मान्यता।
- तनाव की स्थिति में "उचित और सुरक्षित दूरी" बनाए रखें।
- ऐसी जगह खड़े हों जहां आप प्रदर्शनकारियों से साफ अलग दिखें।
- पुलिस की कार्रवाई या आवाजाही में बाधा न डालें।
यह एडवाइजरी तब आई जब तीन महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर को जंतर मंतर के पास पुलिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। पुलिस ने शिकायतें "निष्पक्ष जांच" के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दीं। Organiser दावा · दिल्ली पुलिस महिला प्रदर्शनकारियों से मारपीट के दावे "निराधार और भ्रामक" हैं, और "महिला प्रदर्शनकारियों को महिला कर्मचारी ही संभालती हैं"। Organiser
सीईसी के खिलाफ पहले के प्रदर्शन: 2, 6 और 7 अक्टूबर
ये सभी प्रदर्शन धारा 163 के तहत बिना अनुमति हुए और हिरासत के साथ खत्म हुए।
जंतर मंतर और शिवाजी पार्क
पुलिस ने बैरिकेड वाली जगह को घेर लिया और प्रदर्शनकारियों को बसों में भर दिया। कम से कम 11 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। दोपहर करीब 3 बजे तक की खबरों के मुताबिक दिल्ली में आतिशी समेत 500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा चुके थे। Al Jazeera पीटीआई ने बाद में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 1,000 बताई, जिनमें संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, योगेंद्र यादव और नेहा बोरा शामिल थे। बीएनएस 223 के तहत दर्ज तीन एफआईआर में किसी का नाम नहीं था। Deccan Chronicle/PTI अनुमति न मिलने के बावजूद सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क में रैली की। Outlook
जंतर मंतर पर दूसरा दिन
करीब 200 और लोग हिरासत में लिए गए, और तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। Deccan Chronicle
मुंबई में ठाकरे बंधुओं का मार्च
उद्धव और राज ठाकरे ने सीईसी के खिलाफ मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। Al Jazeera
इंडिया गठबंधन के सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च
विपक्षी सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन की ओर करीब 1 किलोमीटर मार्च किया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद राहुल गांधी और अन्य को कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया। इसके बाद नेता बिना अनुमति आकाशवाणी भवन में घुस गए, जिस पर एफआईआर दर्ज हुई। Al Jazeera ANI
जंतर मंतर जाते सांसदों को रोका गया
पुलिस ने शांगरी-ला होटल के पास सांसदों की बसें रोक दीं। राहुल गांधी को उठाकर पुलिस बस में ले जाया गया, और संविधान थामे सड़क पर लेटी प्रियंका गांधी और अन्य महिला सांसदों को उठाकर हटाया गया। The Week तीन एफआईआर में दोनों गांधी भाई-बहन पर पुलिस पर हमला करने और बाधा डालने का आरोप है। महुआ मोइत्रा ने कहा कि हाथापाई में उन्हें खून निकल आया। ThePrint
दोनों पक्षों की बात
प्रदर्शनकारियों और विपक्ष का पक्ष
सीजेपी का कहना है कि जंतर मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है और अनुच्छेद 19 शांतिपूर्ण विरोध की रक्षा करता है, इसलिए सूचना देना काफी है। दिपके कहते हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा और "महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते" पर चलेगा। विपक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि परिवहन बंदी अनुपातहीन है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को "सरकार के हाथों की कठपुतली" बताया। Outlook Al Jazeera
पुलिस और सरकार का पक्ष
पुलिस का कहना है कि सीजेपी ने 10 दिन के नियम के बजाय कार्यक्रम से तीन दिन पहले आवेदन किया, पहले के अनुमति वाले प्रदर्शन में अपनी अंडरटेकिंग तोड़ी, और सार्वजनिक सुरक्षा व यातायात के लिए पाबंदियां जरूरी हैं। सॉलिसिटर जनरल ने 20 जुलाई के मार्च के बाद हुई हिंसा का हवाला दिया और आरोप लगाया कि उस हफ्ते प्रदर्शनकारियों ने महिला पुलिस अधिकारियों से छेड़छाड़ की। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर "अराजकता फैलाने" की कोशिश का आरोप लगाया। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मत और कानूनी हैं। ANI LiveLaw Al Jazeera
9 अक्टूबर की रात तक की स्थिति
- अनुमति: नहीं मिली। पूरे नई दिल्ली जिले में धारा 163 के आदेश लागू हैं।
- आयोजक: सीजेपी का कहना है कि प्रदर्शन होगा। उसके नेताओं की गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं थी।
- मेट्रो: 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद; नई दिल्ली को छोड़कर इंटरचेंज खुला।
- ट्रेनें: नई दिल्ली और निजामुद्दीन जाने वाली 38 ट्रेनें रद्द; दिल्ली के बाकी स्टेशन सामान्य।
- प्रदर्शन स्थल: केंद्र जंतर मंतर के अलावा कोई और प्रदर्शन स्थल तय करने पर विचार करेगा। अभी कोई फैसला घोषित नहीं।
- अब तक के मामले: 2 अक्टूबर से दिल्ली में करीब 25 एफआईआर, जिनमें तीन में राहुल और प्रियंका गांधी के नाम हैं।
10 अक्टूबर को किन बातों पर नजर रहेगी
- क्या केंद्र या पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिवहन पर नई एडवाइजरी जारी करते हैं, और क्या उसे निर्देश के अनुसार प्रकाशित किया जाता है।
- क्या सीजेपी के नेता जंतर मंतर पहुंच पाते हैं या रोक दिए जाते हैं, और क्या जहां उन्हें रोका जाता है वहीं भीड़ जुटती है, जैसा दिपके ने कहा है।
- हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, उन्हें रखने की जगहें, और किसी भी एफआईआर में लगाई गई धाराएं।
- किसी भी पक्ष की ओर से बल प्रयोग या चोटें, जैसा नामित स्रोतों ने बताया हो।
- वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल पर कोई फैसला।
यह पेज और लाइव टाइमलाइन केवल स्रोतों वाली खबरों के साथ अपडेट किए जाएंगे।
लोग क्या पूछ रहे हैं
क्या 10 अक्टूबर के जंतर मंतर प्रदर्शन की अनुमति है?
नहीं। दिल्ली पुलिस ने 9 अक्टूबर को कम समय में सूचना, पिछले प्रदर्शन में सीजेपी के आचरण, कानून-व्यवस्था, और सार्वजनिक सुरक्षा व यातायात का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के आदेश लागू हैं, और पुलिस का कहना है कि कोई भी जमावड़ा गैरकानूनी होगा।
10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के कौन-से स्टेशन बंद हैं?
डीएमआरसी ने 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया है। इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ, पटेल चौक और नई दिल्ली शामिल हैं।
क्या दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द हैं?
उत्तर रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली 165 में से 38 ट्रेनें रद्द की हैं। दिल्ली के बाकी स्टेशनों पर सेवाएं सामान्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के बारे में क्या कहा?
9 अक्टूबर को कोर्ट ने आदेश दिया कि मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर "पूरी तरह रोक नहीं" होगी, सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलाया जाए और एडवाइजरी का व्यापक प्रचार हो। कोर्ट ने अनुमति न देने का फैसला नहीं पलटा।
प्रदर्शन में शामिल होने पर कौन-सी धाराएं लग सकती हैं?
पहले की एफआईआर में बीएनएस 223 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना) लगाई गई, जिसमें छह महीने तक की सजा या ₹2,500 जुर्माना है, और सुरक्षा को खतरा होने या दंगा होने पर एक साल या ₹5,000 तक। बीएनएस 189 के तहत गैरकानूनी जमावड़े में छह महीने तक, और तितर-बितर होने से इनकार करने पर दो साल तक की सजा है।
स्रोत
- Al Jazeera: India's Cockroach movement demands election chief's resignation, 25 सितंबर 2026
- Business Today: Gyanesh Kumar must resign immediately, says CJP's Abhijeet Dipke, 24 सितंबर 2026
- Al Jazeera: Indian authorities clamp down as Cockroach movement launches new protests, 2 अक्टूबर 2026
- Deccan Chronicle/PTI: Delhi Police registers 3 FIRs over anti-CEC protests, none named, 3 अक्टूबर 2026
- Deccan Chronicle: AISA, other protesters return to Jantar Mantar, nearly 200 detained, 3 अक्टूबर 2026
- Outlook: CJP announces October 10 Jantar Mantar protest if Gyanesh Kumar does not resign, 3 अक्टूबर 2026
- Al Jazeera: Mass protests demanding poll chief's resignation shake India for third day, 4 अक्टूबर 2026
- Outlook: CJP's Saurav Das claims leaders may be arrested, 5 अक्टूबर 2026
- IBTimes: Delhi Police skip name tags at Jantar Mantar, 5 अक्टूबर 2026
- UNI: Delhi Police guidelines for journalists, 6 अक्टूबर 2026
- Organiser: Delhi Police issues protest coverage advisory, 6 अक्टूबर 2026
- DT Next: Left student organisations to join October 10 protest, 6 अक्टूबर 2026
- Deccan Chronicle/PTI: CJP founder Dipke alleges police pressure on activists, 6 अक्टूबर 2026
- Al Jazeera: India opposition leaders briefly arrested in protest against election chief, 6 अक्टूबर 2026
- Outlook: 'This fight not going to be easy': CJP calls for October 10 protest, 7 अक्टूबर 2026
- Deccan Herald: CJP, Left student groups call for Jantar Mantar protest 2.0, 7 अक्टूबर 2026
- ThePrint/PTI: Delhi Police tracking past CJP protesters, logistics suppliers, 7 अक्टूबर 2026
- The Week: Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi detained for third time in 2 days, 7 अक्टूबर 2026
- ThePrint: 3 FIRs against Rahul, Priyanka over assaulting, obstructing police officers, 8 अक्टूबर 2026
- The News Minute: October 10 CJP protest in Delhi: trains cancelled, 57 metro stations to be shut, 9 अक्टूबर 2026
- ANI: Delhi Police register around 25 FIRs over protests since October 2, 9 अक्टूबर 2026
- ANI: Delhi Police denies CJP permission for October 10 Jantar Mantar protest, 9 अक्टूबर 2026
- India TV: Delhi Police denies permission to CJP, cites short notice, 9 अक्टूबर 2026
- ANI: "We will agitate": Dipke says Jantar Mantar protest will go ahead, 9 अक्टूबर 2026
- The Statesman: 'Is Delhi their ancestral property?', 9 अक्टूबर 2026
- Business Standard: What are the rules for holding demonstrations in Delhi?, 9 अक्टूबर 2026
- LiveLaw: Don't completely stop trains/metro in Delhi, Supreme Court to Centre, 9 अक्टूबर 2026
- The Tribune: SC says no to total shutdown of Delhi Metro and railway services, 9 अक्टूबर 2026
- ETV Bharat: Don't use a hammer to kill a fly, 9 अक्टूबर 2026
- Business Today: SC asks Centre not to completely stop metro, train services, 9 अक्टूबर 2026
- ThePrint/PTI: 38 New Delhi, Nizamuddin-bound trains cancelled on Oct 10, 9 अक्टूबर 2026
- The Statesman: Traffic diversions at 30 key points on October 10, 9 अक्टूबर 2026
- Business Today: DMRC issues revised metro closure update, 9 अक्टूबर 2026
- News24: Delhi Metro revises curbs after Supreme Court rap, 45 stations affected, 9 अक्टूबर 2026
- Vidhi Judicial: Section 189 of the Bharatiya Nyaya Sanhita (bare text)